"एक पार्टी ऐसी भी " मंदिर के बाहर अचानक बैठे बूढे बच्चे एक कार को देखकर खुशी से चिल्लाने लगे दीदी भैया आ गये दीदी भैया आ गये ,मेरी नजर भी उसी ओर चली गई देखा तो मेरे ही मित्र आकाश और उनकी पत्नी गौरी अपनी गाड़ी से उतरे ओर देखते ही देखते उनहोने गाड़ी से खाना निकला और दोनों बडे प्यार से वहां बैठे बूढे बच्चो गरीबों को खाना बांटने लगे !

मुझे बडा अच्छा लगा मगर सोचने लगा शायद कोई मुराद पूरी हुई होगी इसीलिए गरीबों को खाना बांट रहे होगे मुझे देखकर दोनों ने मुझसे भी खाना बांटने मे मदद करने को कहा मै भी लग गया!
खैर सबको खिलाकर अंत मे अपने लिए और मेरे लिए भी थाली सजाई तब मैंने वजह पूछी तो दोनों बोले-आज हमारी शादी की सालगिरह है और हम ऐसे गरीबों संग पार्टी करते है वैसे हमारे घरमे किसी का जन्म दिन हो या खुशी का कोई भी मौका तो हम सबसे पहले यही सेलिब्रिट करते है आज मम्मी पापा साथ नही आये शहर से बाहर है वरना हमेशा वही शुरुआत करते है !
मे खुश भी था हैरान भी मेरी हैरानी को समझते हुए आगे बोले-असल मे पहले हम अपने घर मे पार्टी हाल मे ऐसे प्रोग्राम करते थे वहां बचा खाना अक्सर बाहर फेंक दिया जाता था और एकबार हमने कूडेदान से कुछ बच्चो को खाना बीनकर खाते देखा बडा दुख लगा उस वक्त सो तबसे हमने फैसला किया हम इन भूखे गरीबों को पहले खिलायेगे ओर अंत मे खुद खायेगे और ऐसी पार्टी मनायेगे ।
दोस्तों उस वक्त मुझे भी अपने दोनों मित्रो पर बडा गर्व महसूस हो रहा था ओर तबसे मैंने भी ऐसे ही अपने परिवार के लोगों का जन्म दिन ऐसे गरीबों संग मनाना शुरू कर दिया ।आप भी करके देखिए अच्छा लगता है !