फिर सुख में उन सम्बन्धों का रह जाता कोई अर्थ नहीं।

श्री रामधारी सिंह दिनकर :  कोई अर्थ नहीं। 

🌾नित जीवन के संघर्षों से 🌾जब टूट चुका हो अन्तर्मन,
 ब सुख के मिले समन्दर का🌾  रह जाता कोई अर्थ नहीं।

जब फसल सूख कर जल के बिन 🌾तिनका -तिनका बन गिर जाये,
फिर होने वाली वर्षा का रह जाता कोई अर्थ नहीं।

सम्बन्ध कोई भी हों लेकिन 🌾यदि दुःख में साथ न दें अपना,
फिर सुख में उन सम्बन्धों का रह जाता कोई अर्थ नहीं।


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"Jai Shree Radhe Krishna"




🌾छोटी-छोटी खुशियों के क्षण निकले जाते हैं रोज़ जहाँ,
🌾फिर सुख की नित्य प्रतीक्षा का  रह जाता कोई अर्थ नहीं।।

🌾मन कटुवाणी से आहत हो🌾🌾भीतर तक छलनी हो जाये,
🌾फिर बाद कहे प्रिय वचनों का  रह जाता कोई अर्थ नहीं।।

🌾सुख-साधन चाहे जितने हों  पर काया रोगों का घर हो,
🌾फिर उन अगनित सुविधाओं का रह जाता कोई अर्थ नहीं।।

सफलता का मापदंड क्या है ? जानिये और अपनाइये !!

सफलता क्या है ?
*4 वर्ष की उम्र में सफलता यह है कि आप अपने कपड़ों को गीला नहीं करते।*

*8 वर्ष की उम्र में सफलता यह है कि आप अपने घर वापिस आने का रास्ता जानते है।*
*12 वर्ष की उम्र में सफलता यह है कि आप अपने अच्छे मित्र बना सकते है।*
*18 वर्ष की उम्र में मदिरा और सिगरेट से दूर रह पाना सफलता है।*
*25 वर्ष की उम्र तक नौकरी पाना सफलता है।*
*30 वर्ष की उम्र में एक पारिवारिक व्यक्ति बन जाना सफलता है।*
*35 वर्ष की उम्र में आपने कुछ जमापूंजी बनाना सीख लिया ये सफलता है।*
*45 वर्ष की उम्र में सफलता यह है कि आप अपना युवावस्था बरकरार रख पाते हैं।*
*55 वर्ष की उम्र में सफलता यह है कि आप अपनी जिम्मेदारियाँ पूरी करने में सक्षम हैं।*
*65 वर्ष की आयु में सफलता है निरोगी रहना।*
*70 वर्ष की उम्र में सफलता यह है कि आप आत्मनिर्भर हैं किसी पर बोझ नहीं।*
*75 वर्ष की उम्र में सफलता यह है कि आप अपने पुराने मित्रों से रिश्ता कायम रखे हैं।*
*80 वर्ष की उम्र में सफलता यह है कि आपको अपने घर वापिस आने का रास्ता पता है।*
*और 85 वर्ष की उम्र में फिर सफलता ये है कि आप अपने कपड़ों को गीला नहीं करते।*
अंततः यही तो जीवन चक्र है.. जो घूम फिर कर वापस वहीं आ जाता है जहाँ से उसकी शुरुआत हुई है और
*यही जीवन का परम सत्य है।*
संभाल कर रखिए अपने को !
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Uday Narayan Singh

तेरी याद में जल कर देख लिया अब आग में जल कर देखेंगे l





तेरी याद में जल कर देख लिया
अब आग में जल कर देखेंगे
इस राह में अपनी मौत सही
ये राह भी चल कर देखेंगे
तेरि याद मे जल कर …

दीपक की चमक में आग भी है
दुनिया ने कहा परवानों से
परवाने मगर ये कहने लगे
दीवाने तो जल कर देखेंगे
तेरि याद मे जल कर …

तुम प्यार की सुंदर मूरत हो और प्यार हमारी पूजा है l


हम तेरे प्यार में सारा आलम खो बैठे हैं, खो बैठे तुम कहते हो के ऐसे प्यार को भूल जाओ, भूल जाओ पंछी से छुड़ाकर उसका घर, तुम अपने घर पर ले आये ये प्यार का पिंजरा मन भाया, हम जी भर भर कर मुसकाये जब प्यार हुआ इस पिंजड़े से, तुम कहने लगे आज़ाद रहो हम कैसे भुलाये प्यार तेरा, तुम अपनी ज़ुबान से ये ना कहो अब तुमसा जहां में कोई नहीं है, हम तो तुम्हारे हो बैठे तुम कहते हो के ऐसे प्यार को भूल जाओ, भूल जाओ इस तेरे चरण की धूल से हमने अपनी जीवन माँग भरी जब ही तो सुहागन कहलायी, दुनिया की नज़र में प्यार बनी तुम प्यार की सुंदर मूरत हो और प्यार हमारी पूजा है अब इन चरणों में दम निकले, बस इतनी और तमन्ना है हम प्यार के गंगाजल से बलम जी तनमन अपना धो बैठे तुम कहते हो के ऐसे प्यार को भूल जाओ, भूल जाओ सपनों का दर्पन देखा था, सपनों का दर्पन तोड़ दिया ये प्यार का आँचल हमने तो दामन से तुम्हारे बाँध लिया ये ऐसी गाँठ है उल्फ़त की, जिस को ना कोई भी खोल सका तुम आन बसे जब इस दिल में, दिल फिर तो कहीं ना डोल सका ओ प्यार के सागर हम तेरी लहरों में नाव डूबो बैठे तुम कहते हो के ऐसे प्यार को भूल

पत्नी की फरमाइश थी "गाड़ी , बंगला सब चाहिए" पति ने मांग पूरी कर दिया ।

पत्नी की फरमाइश थी "गाड़ी , बंगला सब चाहिए" पति ने मांग पूरी कर दिया ।
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