एक मर्द का दर्द............
पिछले हफ्ते Panday जी की दाढ़ में दर्द हुआ और जिंदगी में पहली बार दाँतों के डॉक्टर के पास गये। रिसेप्शन में बैठे-बैठे पांडे जी की नजर वहाँ दीवार पर लगी डॉक्टर की डिग्री पर पड़ी और उस पर लिखे डॉक्टर के नाम को पढ़ते ही मानो पांडे जी पर बिजली गिर पड़ी।
"Dr. Sarika Varshney" यानि, स्कूल के दिनों की हमारी क्लास की हीरोइन। गोरी-चिट्टी, ऊँची-लम्बी, घुँघराले बालों वाली खूबसूरत लड़की।
अब झूठ क्या बोलूँ, क्लास के दूसरे लड़कों के साथ साथ पांडे जी खुद भी उस पर मरते थे, अपनी सारु पर।
पांडे जी की दिल की धड़कन बढ़ गई। नंबर आने पर पांडे जी ने धड़कते दिल से, सारू के चेम्बर में प्रवेश किया। सारू के माथे पर झूलते घुँघराले बाल अब हट चुके थे, गुलाबी गाल अब फूलकर गोल गोल हो गए थे, नीली आँखें मोटे चश्मे के पीछे छुप गयी थीं लेकिन फिर भी सारू बहुत रौबदार लग रही थी।
लेकिन उसने पांडे जी को पहचाना नहीं। उनकी दाढ़ की जाँच हो जाने के बाद सारू पूछा, "तुम कान्वेंट में पढ़ती थी ना?"
वो बोली, "हाँ"
पांडे जी ने पूछा, "10 वीं से कब निकली? 1991 में ना?"
वो बोली, "करेक्ट! लेकिन आपको कैसे मालूम?"
पांडे जी ने मुस्कराते हुए जवाब दिया, "अरे, तुम मेरी ही क्लास में थी।"
फिर वो भैंस, चश्मिश, हथनी, मोटी, भद्दी, टुनटुन
मुझसे बोली... "सर आप कौन सा सब्जेक्ट पढ़ाते थे........?"