श्री रामधारी सिंह दिनकर : कोई अर्थ नहीं।
🌾नित जीवन के संघर्षों से 🌾जब टूट चुका हो अन्तर्मन,
त ब सुख के मिले समन्दर का🌾 रह जाता कोई अर्थ नहीं।
जब फसल सूख कर जल के बिन 🌾तिनका -तिनका बन गिर जाये,
फिर होने वाली वर्षा का रह जाता कोई अर्थ नहीं।
सम्बन्ध कोई भी हों लेकिन 🌾यदि दुःख में साथ न दें अपना,
फिर सुख में उन सम्बन्धों का रह जाता कोई अर्थ नहीं।

"Jai Shree Radhe Krishna"
🌾छोटी-छोटी खुशियों के क्षण निकले जाते हैं रोज़ जहाँ,
🌾फिर सुख की नित्य प्रतीक्षा का रह जाता कोई अर्थ नहीं।।
🌾मन कटुवाणी से आहत हो🌾🌾भीतर तक छलनी हो जाये,
🌾फिर बाद कहे प्रिय वचनों का रह जाता कोई अर्थ नहीं।।
🌾सुख-साधन चाहे जितने हों पर काया रोगों का घर हो,
🌾फिर उन अगनित सुविधाओं का रह जाता कोई अर्थ नहीं।।