जब कर्म ही है सब कुछ तो कोई जन्म से ही महान् तो कोई जन्म से अछूत क्युँ ?

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Uday Narayan Singh 

अनमोल मोती :

तेरी इस दुनियां में ऐसा मंजर क्यों है ?
कही जख्म तो कहीं पीठ पर खंजर क्यों है?
सुना है कि तू हर जर्रे-जर्रे में रहता है..
तो फिर जमी पर कहीं मस्जिद और मन्दिर क्यों है?
जब रहने वाले इस दुनियां के है तेरे ही बन्दे..
तो फिर कोई किसी का दोस्त और कोई दुश्मन क्यों है?
जब तू ही बनाता है जीवनसाथी तो फ़िर वो एक ही जाति-धर्म के ही क्यो है..?
जब कर्म ही है सब कुछ तो कोई जन्म से ही महान् तो कोई जन्म से अछूत क्युँ है..?
तू ही लिखता है जब सबका मुकद्दर...तो कोई बदनसीब और कोई मुकद्दर का सिकंदर क्यों है?

"सदा मुस्कुराते रहिये"....🌹हँसते रहिये हंसाते रहिये