''इंसान ने वक़्त से पूछा...
"मै हार क्यूं जाता हूँ ?"
वक़्त ने कहा..
धूप हो या छाँव हो,
काली रात हो या बरसात हो,
चाहे कितने भी बुरे हालात हो,
मै हर वक़्त चलता रहता हूँ,
इसीलिये मैं जीत जाता हूँ,
तू भी मेरे साथ चल,
कभी नहीं हारेगा...........

*अगर लोग सिर्फ जरूरत पर ही*
*आपको याद करते हैं,*
*तो उन्हें गलत मत समझिये,*
*क्योंकि*
*आप उनकी जिन्दगी की वो*
*रोशनी की किरण हैं*
*जो उन्हें सिर्फ,*
*अन्धेरों में ही दिखाई देती है…।*
"मै हार क्यूं जाता हूँ ?"
वक़्त ने कहा..
धूप हो या छाँव हो,
काली रात हो या बरसात हो,
चाहे कितने भी बुरे हालात हो,
मै हर वक़्त चलता रहता हूँ,
इसीलिये मैं जीत जाता हूँ,
तू भी मेरे साथ चल,
कभी नहीं हारेगा...........

*अभिमान तब आता है*
*जब हमे लगता है हमने कुछ काम किया है,*
*और*
*सम्मान तब मिलता है जब दुनिया को लगता है,
*जब हमे लगता है हमने कुछ काम किया है,*
*और*
*सम्मान तब मिलता है जब दुनिया को लगता है,
कि आप ने कुछ महत्वपूर्ण काम किया है*
*जो दूसरों को इज़्ज़त देता है*
*असल में वो खुद इज़्ज़तदार होता है*
*क्योकि*
*इंसान दूसरो को वही दे पाता है*
*जो उसके पास होता है।*
*जो दूसरों को इज़्ज़त देता है*
*असल में वो खुद इज़्ज़तदार होता है*
*क्योकि*
*इंसान दूसरो को वही दे पाता है*
*जो उसके पास होता है।*
*अगर लोग सिर्फ जरूरत पर ही*
*आपको याद करते हैं,*
*तो उन्हें गलत मत समझिये,*
*क्योंकि*
*आप उनकी जिन्दगी की वो*
*रोशनी की किरण हैं*
*जो उन्हें सिर्फ,*
*अन्धेरों में ही दिखाई देती है…।*